तुम कसम न दो मुझे ठहर जाने की जनाब,

तुम कसम न दो मुझे ठहर जाने की जनाब,
गर आये मुसीबत तो बदलना सीख जाउंगी,
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बहुत देखे हैं मंजर मैंने भी जिंदगी के,
गर हो आग का दरिया पिघलना सीख जाउंगी,
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बहुत काटें हैं सफलता की राहों पर पता है,
यकीं रखो मैं भी निकलना सीख जाउंगी,
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तुम अगर चाहते हो मुझे छोड़ जाना तो,
जान लो मैं भी बिखरना सीख जाउंगी,
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अगर तुम्हारा दिल आया है किसी और पर,
तो मैं भी किसी को देख मचलना सीख जाउंगी,
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बहुत हुआ तुम्हारी याद में आंसू बहाना अब,
वक़्त बदले तो मैं भी संभालना सीख जाउंगी,

-कवियित्री रश्मि शुक्ला
-पीलीभीत उत्तर प्रदेश

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