जो सोचा है वो झूठ नहीं

जो सोचा है वो झूठ नहीं
महसूस किया जो पाप नहीं
हम रूह की आग में जलते हैं
ये जिस्म का झूठा ताप नहीं

ना कैद उजाले होते हैं
ना खुशबू बंद हो पाती है
क्या बांध सका है कोई हवा
जो साँस है आती जाती है............

#गुलज़ार साहब

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