एक याद की मौजूदगी सह भी नहीं सकत

एक याद की मौजूदगी सह भी नहीं सकते

ये बात किसी और से कह भी नहीं सकते

तू अपने गहन में है तो मैं अपने गहन में

दो चाँद हैं इक अब्र में गह भी नहीं सकते

हम-जिस्म हैं और दोनों की बुनियादें अमर हैं

अब कैसे बिछड़ जाएँ कि ढह भी नहीं सकते

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