चाहत का वही हमसे इरादा नहीं रखता

चाहत का वही हमसे इरादा नहीं रखता
क्या रंज करे उसका जो रिश्ता नहीं रखता

हर बात से ही अपनी वो जाता है फिसल अब
दिल को ही अपने यार वो सच्चा नहीं रखता 

मुश्किल से बड़ी दोस्ती मिलती है जहां में
मैं दोस्ती में कोई भी साैदा नहीं रखता 

क्या बात करे और वफ़ा की यहाँ पे हम
जब कोई वफ़ाओं का इरादा नहीं रखता

वो भूल गया शर्म हया दिल से अपने ही
परदे में सनम अपना ही चेहरा नहीं रखता 

क्या  साथ निभायेगा वही प्यार मुहब्बत 
दिल में ही यकीं अपने  पक्का नहीं रखता

करता हूँ  निभाता हूँ मैं  हर मोड़ पे उसको
झूठा ही  मगर कोई भी वादा नहीं रखता

है याद उसकी हर घड़ी ही साथ मेरे अब
आज़म वो दिल को मेरे अकेला नहीं रखता

आज़म सावन खान

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