इश्क मुझको हुआ ,सिर्फ तुमसे हुआ ,

इश्क  मुझको  हुआ ,सिर्फ  तुमसे   हुआ ,
ये  सही गर  नहीं  ,तो   गलत   भी  कहाँ ..!

ये  गलत  भी  है  तो  तुम  गुनहगार  हो ,
तेरी  हर  इक  अदा  पर  फिदा  हम  सनम ..!

सौ कसम  खा के  गुजरे  तेरे  दर  से  हम
मिल गयी  जब  नजर  , टूटी  सारी  कसम..!

तुम  मेरा  प्यार  हो ,ये हशीं   ख्वाब  है ,
इसको वाजिब  हकीकत  बना  दो सनम..!

झुकती  पलको  मे है एक नशा  प्यार  का
शोख   आखों  से नाराजगी  हो  बयाँ..!

फिर  मेरे  संग  कदम तुम   मिलाती  हो क्यूँ ,
हँसके   फिर हौसला  तुम   बढ़ा़ती  हो  क्यूँ..!

सब  इशारे  तुम्हारे  है  इकरार  के ,
इस कदर  मुझको  तुम  आजमाती   हो क्यूँ ...!

प्यार  कुछ  भी  नहीं  एक जजबात   है ,
दो धडकते  दिलो  का इक  एहसास है..!

मैं  हकीकत  हूँ  कोई  फसाना  नहीं ,
मैं  आशिक हूँ कोई  दिवाना नहीं..!

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