खुली आँखों में सपना झाँकता है !

खुली आँखों में सपना झाँकता है !
वो सोया है कि कुछ कुछ जागता है!!

तिरी चाहत के भीगे जंगलों में !
मिरा तन मोर बन के नाचता है!!

मुझे हर कैफ़ियत में क्यों न समझे!
वो मेरे सब हवाले जानता है!!

मैं उसकी दस्तरस में हूँ मगर वो!
मुझे तेरी रिज़ा से माँगता है!!

किसी के ध्यान में डूबा हुआ दिल!
बहाने से मुझे भी टालता है !!


⭐⭐⭐परवीन शाक़िर⭐⭐⭐

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