क्या लिखूँ ......?

क्या लिखूँ ......?

शुन्य  हो जाती है भावनायें  मेरी
विलुप्त  हो जाती है मन की आकांक्षाए
जब चलते चलते रुक जाते है
   ..............कदम............

सूख  जाती है  मन की लेखनी
जब पलकों की कुछ बूंदे
आ कर गिरती है
इन कोरे पन्नो पर
    ............ तो...............

लिख जाता हुँ  अपने  अनुभवों को
अपने आंसुओ की नमी से
फट   जाते है पन्ने मेरे

ग़मो  में  डूब  कर .......फिर सोचता हुँ  की क्या
लिखूँ...................?

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