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Love a person, Relationship

*"If you love a person and live the whole life with him or with her, a great intimacy will grow and love will have deeper and deeper revelations to make to you.  It is not possible if you go on changing partners very often.  It is as if you go on changing a tree from one place to another, then another; then it never grows roots anywhere.  To grow roots, a tree needs to remain in one place.  Then it goes deeper; then it becomes stronger.  Intimacy is good, and to remain in one commitment is beautiful, but the basic necessity is love.  If a tree is rooted in a place where there are only rocks and they are killing the tree, then it is better to remove it.  Then don’t insist that it should remain in the one place.  Remain true to life – remove the tree, because now it is going against life.”*

*_OSHO_*

_Good morning dear friends !_

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बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर..

हमारे सहायक

एक अतिश्रेष्ठ व्यक्ति थे, एक दिन उनके पास एक निर्धन आदमी आया और बोला की:- "मुझे अपना खेत कुछ साल के लिये उधार दे दीजिये, मैं उसमे खेती करूँगा और खेती करके कमाई करूँगा।"
वह अतिश्रेष्ठ व्यक्ति बहुत दयालु थे, उन्होंने उस निर्धन व्यक्ति को अपना खेत दे दिया और साथ में पांच सहायक किसान भी सहायता के रूप में खेती करने को दिये और कहा की:- "इन पांच सहायक किसानों को साथ में लेकर खेती करो, खेती करने में आसानी होगी, इस से तुम और अच्छी फसल की खेती करके कमाई कर पाओगे।"
वो निर्धन आदमी ये देख के बहुत खुश हुआ की उसको "उधार में खेत भी मिल गया और साथ में पांच सहायक किसान भी मिल गये।"
लेकिन वो आदमी अपनी इस ख़ुशी में बहुत खो गया, और वह पांच सहायक किसान अपनी मर्ज़ी से खेती करने लगे और वह निर्धन आदमी रात-दिन अपनी ख़ुशी में ही डूबा रहा।
और जब फसल काटने का समय आया तो देखा की फसल बहुत ही ख़राब हुई थी।
उन पांच सहायक किसानों ने खेत का उपयोग अच्छे से नहीं किया था, न ही अच्छे बीज डाले, जिससे फसल अच्छी हो सके।
जब उस अतिश्रेष्ठ दयालु व्यक्ति ने अपना खेत वापस माँगा तो वह निर्धन व्यक्ति रोता ह…

हरिवंशराय बच्चन जी की एक खूबसूरत कविता

हरिवंशराय बच्चन जी की एक खूबसूरत कविता,, _"रब" ने. नवाजा हमें. जिंदगी. देकर;_
_और. हम. "शौहरत" मांगते रह गये;_
_जिंदगी गुजार दी शौहरत. के पीछे;_
_फिर जीने की "मौहलत" मांगते रह गये।_ _ये कफन , ये. जनाज़े, ये "कब्र" सिर्फ. बातें हैं. मेरे दोस्त,,,_
_वरना मर तो इंसान तभी जाता है जब याद करने वाला कोई ना. हो...!!_ _ये समंदर भी. तेरी तरह. खुदगर्ज़ निकला,_
_ज़िंदा. थे. तो. तैरने. न. दिया. और मर. गए तो डूबने. न. दिया . ._ _क्या. बात करे इस दुनिया. की_
_"हर. शख्स. के अपने. अफसाने. हे"_ _जो सामने. हे. उसे लोग. बुरा कहते. हे,_
_जिसको. देखा. नहीं उसे सब "खुदा". कहते. है. 👏👏👏👏👏👏

हो गई है पीर पर्वत-सी

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
- दुष्यन्त कुमार

रोशनी चाही थी, आग लगा दी किसने

रोशनी चाही थी, आग लगा दी किसने
मेरी नेकियों की, मुझे सज़ा दी किसने राख के ढ़ेर में अमन पसरा था
बुझें अंगारों को फिर हवा दी किसने चांद खामोश था, तारें झपकियां लेते हुए
खामोश रात में बिरहन की पीर जगा दी किसने बुरा किया है किसी का, ना बुरा चाहा है
ना-करदा गुनाहों की सज़ा दी किसने साफ-आसमां है, घर सैलाब में डूबा है
अश्कों की झड़ी लगा दी किसने खामोश मुहब्बत, खामेशी से मिलते हैं
शहर भर में मुहब्बत की बात उड़ा दी किसने..

चोट पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया ~कुँवर बेचैन

चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया
पत्थर को बुत की शक्ल में लाने का शुक्रियाजागा रहा तो मैंने नएकामकरलिए
नींदआज तेरे न आने का शुक्रियासूखा पुराना ज़ख्मनए को जगह मिली
स्वागतनए का और पुराने का शुक्रियाआतीं न तुम तो क्यों मैं बनाता ये सीढ़ियाँ
दीवारों, मेरी राह में आने का शुक्रियाआँसू-सा माँ की गोद में आकरसिमट गया
नज़रों से अपनी मुझको गिराने का शुक्रियाअबयहहुआ कि दुनिया ही लगती है मुझको घर
यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रियाग़म मिलते हैं तो और निखरती है शायरी
यहबात है तो सारे ज़माने का शुक्रियाअब मुझको आ गए हैं मनाने के सबहुनर
यूँ मुझसे `कुँअर' रूठ के जाने का शुक्रिया...

दिल के टुकड़े मजबूर करते है कलम चलाने को वरना

^दिल के टुकड़े मजबूर करते है कलम चलाने को वरना...हक़ीक़त में कोई भी खुद का दर्द लिखकर खुश नही होता..

^मैं तो बस एक मामूली सा सवाल हूँ “साहिब..!और लोग कहते हैं.. तेरा... कोई जवाब नहीं....!!!!
^दर्द हल्का है,
साँस भारी है,जिए जाने की
रस्म जारी है...
^शौंक नहीं है मुझे अपने जज़्बातों को यूँ सरेआम लिखने का …मगर क्या करूँ ,
अब जरिया ही ये है तुझसे बात करने का..........


^एक मुट्ठी इश्क़ बिखेर दो  इस ज़मीन पे,बारिश का मौसम है शायद मोहब्बत पनप जाए।

एक शिक्षाप्रद लघु दृष्टांत।

किसी राजा के पास एक बकरा था। एक बार उसने एलान किया की जो कोई इस बकरे को जंगल में चराकर तृप्त करेगा मैं उसे आधा राज्य दे दूंगा।किंतु बकरे का पेट पूरा भरा है या नहीं इसकी परीक्षा मैं खुद करूँगा।इस एलान को सुनकर एक मनुष्य राजा के पास
आकर कहने लगा कि बकरा चराना कोई बड़ी बात नहीं है।वह बकरे को लेकर जंगल में गया और सारे दिन उसे घास चराता रहा,, शाम तक उसने बकरे को खूब घास खिलाई और फिर सोचा की सारे दिन इसने इतनी घास खाई है। अब तो इसका पेट भर गया होगा तो अब इसको राजा के पास ले चलूँ,,बकरे के साथ वह राजा के पास गया,, राजा ने थोड़ी सी हरी घास बकरे के सामने रखी तो बकरा उसे खाने लगा।इस पर राजा ने उस मनुष्य से कहा की तूने उसे पेट भर खिलाया ही नहीं वर्ना वह घास क्यों खाने लगता।बहुत जनो ने बकरे का पेट भरने का प्रयत्न किया किंतु ज्यों ही दरबार में उसके सामने घास डाली जाती तो वह फिर से खाने लगता।एक विद्वान् ब्राह्मण ने सोचा इस एलान का कोई तो रहस्य है, तत्व है,,मैं युक्ति से काम लूँगा,, वह बकरे को चराने के लिए ले गया। जब भी बकरा घास खाने के लिए जाता तो वह उसे लकड़ी से मारता,, सारे दिन में ऐसा कई बार हुआ,, …

कवि डाकू

एक कवि गरीबी से तंग आकर डाकू बन
गया और एक बैंक लूटने जा पहुंचा.
बन्दूक लहराते हुए बोला -
“अर्ज किया है …
तकदीर में जो है वही मिलेगा …
हैंड्स अप ! … कोई अपनी जगह से
नहीं हिलेगा … !”
फिर कैशियर से बोला -
“कुछ ख्वाब मेरी आँखों में से निकाल
दो …
जो कुछ भी है जल्दी से इस बैग में डाल
दो … ”
माल समेटने के बाद पब्लिक से बोला -
“बहुत कोशिश करता हूँ तेरी याद
भुलाने की …
ख़बरदार जो किसी ने कोशिश
की पुलिस बुलाने की … ”
जाते-जाते बैंक के गार्ड से बोला -
“भुला देना मुझको क्या जाता है
तेरा …
मैं गोली मार
दूंगा जो पीछा किया मेरा … !!!

किसी शायर ने अपनी अंतिम यात्रा का क्या खूब वर्णन किया है.....

किसी शायर ने अपनी अंतिम यात्रा
का क्या खूब वर्णन किया है.....था मैं नींद में और
मुझे इतना
सजाया जा रहा था....बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा
था....ना जाने
था वो कौन सा अजब खेल
मेरे घर
में....बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जा रहा
था....था पास मेरा हर अपना
उस
वक़्त....फिर भी मैं हर किसी के
मन
से
भुलाया जा रहा था...जो कभी देखते
भी न थे मोहब्बत की
निगाहों
से....उनके दिल से भी प्यार मुझ
पर
लुटाया जा रहा था...मालूम नही क्यों
हैरान था हर कोई मुझे
सोते
हुए
देख कर....जोर-जोर से रोकर मुझे
जगाया जा रहा था...काँप उठी
मेरी रूह वो मंज़र
देख
कर....
.
जहाँ मुझे हमेशा के
लिए
सुलाया जा रहा था....
.
मोहब्बत की
इन्तहा थी जिन दिलों में
मेरे
लिए....
.
उन्हीं दिलों के हाथों,
आज मैं जलाया जा रहा था!!! 🍁🍂🍁🍂🍁🍂🍁🍂
    👌 लाजवाब लाईनें👌
🍁🍂🍁🍂🍁🍂🍁🍂मिली थी जिन्दगी
      किसी के 'काम' आने के लिए..           पर वक्त बीत रहा है
     कागज के टुकड़े कमाने के लिए..                       
   क्या करोगे इतना पैसा कमा कर..?
ना कफन मे 'जेब' है ना कब्र मे 'अलमारी..'       और ये मौत क…