कहाँ आ के रुकने थे रास्ते

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते
कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
वो जो मिल गया उसे याद रख
जो नहीं मिला उसे भूल जा
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते
कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
वो तेरे नसीब की बारिशें
किसी और छत पे बरस गयीं
दिल-इ-बेखबर मेरी बात सुन
उसे भूल जा , उसे भूल जा
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते
कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
मैं तो घुम था तेरे ही ध्यान में
तेरी आस तेरे घुमान में
सबा कह गई मेरे काण में
मेरे साथ आ उसे भूल जा
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते
कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
किसी आँख में नबी अश्क़-इ-ग़म
तेरे बाद कुछ भी नहीं है कम
तुझे ज़िन्दगी ने भुला दिया
तू भी मुस्कुरा उसे भूल जा
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते
कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
ना वो आँख ही तेरी आँख थी
ना वो खुवाब ही तेरा खुवाब था
दिल-इ-मुन्तज़िर तो या किस लिए
तेरा जागना उसे भूल जा
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते
कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते
कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
वो जो मिल गया उसे याद रख
जो नहीं मिला उसे भूल जा
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते
कहाँ मोड़ था उसे भूल जा

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