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February, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

*आदमी बेईमान है*

📚 *ओशो बिखरे मोती* 📚
*ओशो की पुस्तकों से गद्य अंश*
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*आदमी बेईमान है*मैंने सुना है, एक अंधे आदमी की आंख का ऑपरेशन हो रहा था। उसने डाक्टर से पूछा कि क्या आंख के ऑपरेशन के बाद मैं पढ़ना लिखना कर सकूंगा? डाक्टर ने कहा, निश्चित। जाली है तुम्हारी आंख पर, कट जाएगी जाली, निकल जाएगी जाली, जरूर पढ़ लिख सकोगे। वह आदमी बड़ी खुशी से बोला कि हे प्रभु, तेरा बड़ा धन्यवाद है! डाक्टर ने कहा, इसमें धन्यवाद प्रभु को देने की कोई जरूरत नहीं, यह तो स्वाभाविक है, आंख से जाली कट गई कि पढ़ना लिखना आसान हो जाएगा। उस अंधे ने कहा, लेकिन बात यह है कि पढ़ना लिखना मैं जानता नहीं। जब मेरी आंख ठीक थी तब भी मैं पढ़ लिख नहीं सकता था। तो यह चमत्कार ही है कि अब तुम जाली काट दोगे और मुझे पढ़ना लिखना आ जाएगा। इससे बड़ा और चमत्कार क्या हो सकता है!अगर पढ़ना लिखना नहीं आता तो आंख की जाली कटने से भी नहीं आ जाएगा।यहां तुम्हें परमात्मा नहीं दिखाई पड़ता; जंगल में भी आंख तो यही होगी, तुम तो यही होओगे ठीक यही, जरा सा भी तो भेद न होगा। परिस्थिति बदल जाएगी, मनःस्थिति तो न बदल जाएगी। तुम यहां नहीं देख पाते उसे, वहां कैसे देख प…

किसी शायर ने अपनी अंतिम यात्रा का क्या खूब वर्णन किया है.....

किसी शायर ने अपनी अंतिम यात्रा
का क्या खूब वर्णन किया है.....था मैं नींद में और
मुझे इतना
सजाया जा रहा था....बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा
था....ना जाने
था वो कौन सा अजब खेल
मेरे घर
में....बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जा रहा
था....था पास मेरा हर अपना
उस
वक़्त....फिर भी मैं हर किसी के
मन
से
भुलाया जा रहा था...जो कभी देखते
भी न थे मोहब्बत की
निगाहों
से....उनके दिल से भी प्यार मुझ
पर
लुटाया जा रहा था...मालूम नही क्यों
हैरान था हर कोई मुझे
सोते
हुए
देख कर....जोर-जोर से रोकर मुझे
जगाया जा रहा था...काँप उठी
मेरी रूह वो मंज़र
देख
कर....
.
जहाँ मुझे हमेशा के
लिए
सुलाया जा रहा था....
.
मोहब्बत की
इन्तहा थी जिन दिलों में
मेरे
लिए....
.
उन्हीं दिलों के हाथों,
आज मैं जलाया जा रहा था!!! 🍁🍂🍁🍂🍁🍂🍁🍂
    👌 लाजवाब लाईनें👌
🍁🍂🍁🍂🍁🍂🍁🍂मिली थी जिन्दगी
      किसी के 'काम' आने के लिए..           पर वक्त बीत रहा है
     कागज के टुकड़े कमाने के लिए..                       
   क्या करोगे इतना पैसा कमा कर..?
ना कफन मे 'जेब' है ना कब्र मे 'अलमारी..'       और ये मौत क…

Buddha ~ OSHO

I love the Gautam Buddha as I have loved nobody else. I have been speaking on him throughout my whole life. Even speaking on others I have been speaking on him. Take note of it, it is a confession. I cannot speak on Jesus without bringing Buddha in; I cannot speak on Mohammed without bringing Buddha in. Whether I mention him directly or not that's another matter. It is really impossible for me to speak without bringing Buddha in. He is my very blood, my bones, my very marrow. He is my silence, also my song. book06Ordinarily religions like Christianity or Mohammedanism are afraid that if they allow somebody to come too close, they may lose their own identity. Buddhism was never afraid, and it never lost its identity.
I have been to Buddhist conferences where people from Tibet and Japan and Sri Lanka and China and Burma and other countries were present, and that has been my one experience—that they all differed with each other, but they were still connected with a single devotion to…

Civilization - OSHO

There are stories about cultures reaching to the peak. But those that reached the ultimate height eventually had to go underground.There is a lake named Titicaca in South America. It is a unique lake. It has puzzled scientists, because a river falls into this lake. Millions of gallons of water fall daily into this lake and there is no way for it to flow out of the lake. Yet not an inch of water rises in the lake. Scientists are confounded. Where does all this water go? The lake has been observed for hundreds of years. It is said that beneath the lake there are the ruins of the ancient civilization of the Incas. This lake is supposed to have been its reservoir. The Incas are no more, but their arrangement for collecting water still remains. Scientists now think that this was the water supply of a people who lived beneath the lake. A lot of research is going on to discover this lost civilization.The more developed a society becomes, the more it goes underground. In Mohenjo Daro and Hara…

कर्म परिणाम

कमाल  का  मैसेजअर्जुन  श्री कृष्णजी से बोले :-
केशव ,जब मृत्यु सभी की होनी है तो हम सत्संग भजन सेवा सिमरन क्यों करे जो इंसान मौज मस्ती करता है मृत्यु तो उसकी भी होगी  ।श्री कृष्णजी ने अर्जुन से कहा :- हे  पार्थ
बिल्ली जब चूहे को पकड़ती है तो दांतो से पकड़कर उसे मार कर खा जाती है । लेकिन उन्ही दांतो से जब अपने बच्चे को पकड़ती है तो उसे मारती नहीं बहुत ही नाजुक तरीके से एक जगह से दूसरी जगह पंहुचा देती है । दांत भी वही है मुह भी वही है पर परिणाम अलग अलग । ठीक उसी प्रकार मृत्यु भी सभी की होगी पर एक प्रभु के धाम में और दूसरा 84 के चक्कर में 🙏

जीवन का आदर्श क्या है?'

एक युवक ने पूछा है।
रात्रि घनी हो गयी है और आकाश तारों से भरा है। हवाओं में आज सर्दी है और शायद कोई कहता था कि कहीं ओले पड़े हैं। राह निर्जन है और वृक्षों के तले घना अंधेरा है।
और इस शांत शून्य-घिरी रात्रि में जीना कितना आनंदमय है! होना मात्र ही कैसा आनंद है, पर हम 'मात्र जीना' नहीं चाहते हैं! हम तो किसी आदर्श के लिए जीन चाहते हैं। जीवन को साधन बनाना चाहते हैं, जो कि स्वयं साध्य है। यह आदर्श दौड़ सब विषाक्त कर देती है। यह आदर्श का तनाव सब संगीत तोड़ देता है।
अकबर ने एक बार तानसेन से पूछा था, 'तुम अपने गुरु जैसा क्यों नहीं गा पाते हो- उनमें कुछ अलौकिक दिव्यता है।' उत्तर में तानसेन ने कहा था, 'वे केवल गाते हैं- गाने के लिए गाते हैं। और मैं-मेरे गाने में उद्देश्य है।'
किसी क्षण केवल जीकर देखो। केवल जीओ- जीवन से लड़ो मत, छीना-झपटी न करो। चुप होकर देखो, क्या होता है! जो होता है, उसे होने दो। 'जो है', उसे होने दो। अपनी तरफ से सब तनाव छोड़ दो और जीवन को बहने दो। जीवन को घटित होने दो और जो घटित होगा- मैं विश्वास दिलाता हूं- वह मुक्त कर देता है।
आदर्श का भ्रम सद…

Unattachment in Love {Real Love}

“Real love begins when nothing is expected in return.” ~ Thich Nhat HanhA healthy relationship doesn’t come by chance, but by choice.Unattachment in love is truly possible. It isn’t about letting go of anything but rather changing our expectations of what we want from the relationship.Regardless of how spiritual or evolved we are, relationships challenge our shadow side and point out the work we have to do in order to get past our childhood wounds.Unattachment in love isn’t about letting go of the person, or even of the love itself.It has to do with remaining unattached to any expectations or predetermined end result that many use to judge a successful relationship.It seems that there is a blueprint for relationships that we all are expected to follow. We meet, we kiss, we talk, we spend more time together, we say I love you, we meet families, we move in and then of course a diamond ring will eventually follow.Yet, that isn’t unattachment in love; rather it’s following a plan—and a ra…

हमारे सहायक

एक अतिश्रेष्ठ व्यक्ति थे, एक दिन उनके पास एक निर्धन आदमी आया और बोला की:- "मुझे अपना खेत कुछ साल के लिये उधार दे दीजिये, मैं उसमे खेती करूँगा और खेती करके कमाई करूँगा।"
वह अतिश्रेष्ठ व्यक्ति बहुत दयालु थे, उन्होंने उस निर्धन व्यक्ति को अपना खेत दे दिया और साथ में पांच सहायक किसान भी सहायता के रूप में खेती करने को दिये और कहा की:- "इन पांच सहायक किसानों को साथ में लेकर खेती करो, खेती करने में आसानी होगी, इस से तुम और अच्छी फसल की खेती करके कमाई कर पाओगे।"
वो निर्धन आदमी ये देख के बहुत खुश हुआ की उसको "उधार में खेत भी मिल गया और साथ में पांच सहायक किसान भी मिल गये।"
लेकिन वो आदमी अपनी इस ख़ुशी में बहुत खो गया, और वह पांच सहायक किसान अपनी मर्ज़ी से खेती करने लगे और वह निर्धन आदमी रात-दिन अपनी ख़ुशी में ही डूबा रहा।
और जब फसल काटने का समय आया तो देखा की फसल बहुत ही ख़राब हुई थी।
उन पांच सहायक किसानों ने खेत का उपयोग अच्छे से नहीं किया था, न ही अच्छे बीज डाले, जिससे फसल अच्छी हो सके।
जब उस अतिश्रेष्ठ दयालु व्यक्ति ने अपना खेत वापस माँगा तो वह निर्धन व्यक्ति रोता ह…

The real Study

मेरे दिल को "छू" गया...
आप भी ट्राई करो...
"एक बार जरुर पढे "  पढ़ाई पूरी करने के बाद एक छात्र किसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने की चाह में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा....छात्र ने बड़ी आसानी से पहला इंटरव्यू पास कर लिया...अब फाइनल इंटरव्यू
कंपनी के डायरेक्टर को लेना था...और डायरेक्टर को ही तय
करना था कि उस छात्र को नौकरी पर रखा जाए या नहीं...डायरेक्टर ने छात्र का सीवी (curricular vitae)  देखा और पाया  कि पढ़ाई के साथ- साथ यह  छात्र ईसी (extra curricular activities)  में भी हमेशा अव्वल रहा...डायरेक्टर- "क्या तुम्हें  पढ़ाई के दौरान
कभी छात्रवृत्ति (scholarship)  मिली...?"छात्र- "जी नहीं..."डायरेक्टर- "इसका मतलब स्कूल-कॉलेज  की फीस तुम्हारे पिता अदा करते थे.."छात्र- "जी हाँ , श्रीमान ।"डायरेक्टर- "तुम्हारे पिताजी  क्या काम  करते  है?"छात्र- "जी वो लोगों के कपड़े धोते हैं..."यह सुनकर कंपनी के डायरेक्टर ने कहा- "ज़रा अपने हाथ तो दिखाना..."छात्र के हाथ रेशम की तरह मुलायम और नाज़ुक थे...डायरेक्टर- "…

ईश्वर सर्वदृष्टा है

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किसी गांव में एक गरीब ब्राहमण रहता था. वह लोगों के घरों में पूजा पाठ कर के अपनी जीविका चलाता था. एक दिन एक राजा ने इस ब्राहमण को पूजा के लिए बुलवाया. ब्राहमण ख़ुशी ख़ुशी राजा के यहाँ चला गया.
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जब ब्राहमण अपने घर को आने लगा तो राजा ने ब्राहमण से पूछा- आप ईश्वर की बातें करते हैं. पूजा- अर्चना से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताते हैं. बताइए, ईश्वर कहाँ रहता है, किधर देखता है और क्या करता है ?
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ब्राहमण ने कुछ सोचने के बाद राजा से कहा- महाराज मुझे कुछ समय चाहिए इस सवाल का उत्तर देने के लिए. राजा ने एक महीने का समय दिया. एक महीने बाद आकर इस सवाल का उत्तर दे जाना.
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ब्राहमण इसका उत्तर सोचता रहा और घर की ओर चलता रहा परन्तु उसके कुछ समझ नहीं आ रहा था. समय बीतने के साथ साथ ब्राहमण की चिंता भी बढ़ने लगी और ब्राहमण उदास रहने लगा.
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ब्रह्ममण का एक बेटा था जो काफी होशियार था उसने अपने पिता से उदासी का कारण पूछा. ब्राहमण ने बेटे को बताया कि राजा ने उस से एक सवाल का जवाब माँगा है कि ईश्वर कहाँ रहता है, किधर देखता है और क्या करता है ?
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मुझे कुछ सूझ नहीं रहा है. बेटे ने कहा-पिता जी आप म…