संदेश

वह हंस कर के उनका जादू बिखेरना

ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं , और क्या जुर्म है पता ही नहीं ।

गए मौसम में जो खिलते थे गुलाबों की तरह

कितनी बार बोला है तुम्हें मत आया करो मेरे ख्वाबों में,

जान लेती नहीं जीना मुहाल कर दिया

मेरा ख्वाब मेरा ख्याल तुम ..

तुम आओ तो जरा बता देना

शुरू जो प्यार का ये सिलसिला नहीं होता ..

वो अपनी ही कही बात से...पलट गया।

खुली आँखों में सपना झाँकता है !

तिनको का आशियाँ था, पल में उजड़ गया

ऐ इश्क न छेड़ आ आ के हमें

गिड़गिड़ाए नही, हाँ हम्दों सना से माँगी - मुनव्वर राना

इश्क़ दिल में हो.. और....

क्या दुःख है, समंदर को बता भी नहीं सकता - वसीम बरेलवी

अब आग के लिबास को ज़्यादा न दाबिए - कुँवर बेचैन

दिल से मिला के दिल, प्यार कीजिये

उसको मेरा ख़याल था ही नहीं,

इश्के व्यापार हम नही करते

अजी हम कभी ग़म के मारे न होते